सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर रिट याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। गीतांजलि ने लद्दाख में हाल ही में हुई हिंसक झड़पों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत उनकी नज़रबंदी को चुनौती दी। अदालत इस मामले की सुनवाई अगले मंगलवार (14 अक्टूबर) को करेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उन्हें नज़रबंदी के आधार बताए जाने चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि नज़रबंदी के आधार बंदी (सोनम वांगचुक) को बताए जा चुके हैं। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि क़ानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि पत्नी को नज़रबंदी के आधार बताए जाएं।
हालांकि, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने सिब्बल से कहा कि वह याचिकाकर्ता को नज़रबंदी के आधार बताने के संबंध में आज कोई आदेश नहीं देगी।
जस्टिस कुमार ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि याचिकाकर्ता को आधार प्रदान करने में क्या बाधा है।
सॉलिसिटर जनरल ने दोहराया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पत्नी को आधार प्रदान करने का कोई कानूनी आदेश नहीं है।
सिब्बल ने कहा कि हिरासत के आधार के बिना हिरासत आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्नी को हिरासत के आधार न दिए जाने को हिरासत को चुनौती देने का आधार नहीं माना जाएगा और वह इसलिए ऐसा कर रहे हैं ताकि हिरासत को ही चुनौती दी जा सके।
सिब्बल ने याचिकाकर्ता के लिए मेडिकल सहायता की मांग करते हुए अंतरिम राहत का भी मुद्दा उठाया। इस संबंध में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जब हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मेडिकल जांच के लिए पेश किया गया तो उसने कहा कि वह कोई दवा नहीं ले रहा है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यदि किसी मेडिकल आपूर्ति की आवश्यकता होगी तो वह सुनिश्चित की जाएगी।
सिब्बल के इस अनुरोध के संबंध में कि याचिकाकर्ता (पत्नी) को सोनम वांगहुक से मिलने की अनुमति दी जाए, जस्टिस कुमार ने पूछा कि क्या उन्होंने उनसे मिलने का कोई अनुरोध किया। यह देखते हुए कि उन्होंने ऐसा कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया, जस्टिस कुमार ने कहा कि ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। जस्टिस कुमार ने कहा कि पहले अनुरोध करें और अगर वह अस्वीकार कर दिया जाता है तो फिर अदालत का रुख करें।
एसजी ने कहा कि याचिकाकर्ता यह कहकर “हल्ला” मचाने और “भावनात्मक मुद्दा” खड़ा करने की कोशिश कर रहा है कि बंदी को मेडिकल सहायता और उसकी पत्नी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस कुमार ने यह भी पूछा कि याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। सिब्बल ने जवाब दिया कि हिरासत का आदेश केंद्र सरकार द्वारा पारित किया गया और पूछा कि किस उच्च न्यायालय का रुख किया जा सकता है।
अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका है, जिसमें कथित तौर पर जोधपुर की जेल में बंद वांगचुक की रिहाई की मांग की गई। रिट याचिका के अनुसार, अंगमो ने अनुच्छेद 22 के तहत हिरासत को अवैध बताते हुए चुनौती दी, क्योंकि दोनों में से किसी को भी गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं दिया गया।
वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था. इससे दो दिन पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा देने एवं छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में केंद्र शासित प्रदेश में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे। वांगचुक राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं।
वांगचुक की पत्नी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वांगचुक के पाकिस्तान-चीन लिंक का झूठा प्रचार इस गांधीवादी आंदोलन को बदनाम करने की साजिश है। सोनम वांगचुक और उनके सहयोगियों के खिलाफ एक झूठा और खतरनाक नैरेटिव फैलाया जा रहा है, जिससे उनके गांधीवादी आंदोलन को पाकिस्तान और चीन से जोड़कर बदनाम किया जा सके। याचिका में कहा गया है कि ऐसी दुर्भावनापूर्ण अफवाहें लोकतांत्रिक असहमति को कलंकित करने का प्रयास हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि वास्तव में वांगचुक हमेशा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए काम करते रहे हैं और भारतीय सेना की मदद के लिए ऊंचाई वाले इलाकों में शेल्टर जैसी नई-नई तकनीकें विकसित की हैं. ये गिरफ्तारी गैरकानूनी है। उन्हें डिटेंशन ऑर्डर की कॉपी नहीं दी गई है’।
सोनम वांगचुक गीतंजलि अंगमो की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में 8 मांगे रखीं-हैबियस कॉर्पस जारी कर सोनम वांगचुक को तत्काल सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया जाए। पत्नी को पति से फोन पर और व्यक्तिगत रूप से मिलने की अनुमति दी जाए। सोनम वांगचुक को उनकी दवाएं, कपड़े, भोजन और आवश्यक वस्तुएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं। गिरफ्तारी आदेश और उससे जुड़े सभी दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किए जाएं। गिरफ्तारी को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित किया जाए। सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई का आदेश दिया जाए। उनकी तात्कालिक मेडिकल जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) और उससे जुड़े छात्रों व सदस्यों के उत्पीड़न को रोका जाए।
(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)